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Friday, 16 May 2014

JAIN VAANI - JAI JEENENDRA


JAIN VAANI LIVE UPDATES TODAY 16 MAY

जैन धर्म का परम पवित्र और अनादि मूलमंत्र है- णमो अरिहंताणं। णमो सिद्धाणं। णमो आइरियाणं। णमो उवज्झायाणं। णमो लोए सव्वसाहूणं॥ अर्थात अरिहंतो को नमस्कार, सिद्धों को नमस्कार, आचार्यों को नमस्कार, उपाध्यायों को नमस्कार, सर्व साधुओं को नमस्कार। ये पाँच परमेष्ठी हैं।

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Wednesday, 14 May 2014

JAIN VAANI UPDATES... 15 MAY 2014


JAIN VAANI UPDATES...

तिनलोक के नाथ श्री 1008 पार्श्वनाथ भगवान की जय जय जय...

जय हो भगवन...


Jain Vaani - Live Updates Today

卐卐卐 सरलता और सोम्यता की प्रतिमूर्ति मुनि श्री विशेषसागरजी महाराजजी के चरणों में बारम बार नमोस्तु नमोस्तु नमोस्तु 卐卐卐
मुनि श्री अभी इंदौर(म.प्र.) में विराजमान हे...
"जय जय गुरुदेव"

"जय जिनेन्द्र"


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Monday, 12 May 2014

"............."माँ"............."

"............."माँ"............."
माँ- दुःख में सुख का एहसास है,
माँ - हरपल मेरे आस पास है ।
माँ- घर की आत्मा है,
माँ- साक्षात् परमात्मा है ।
माँ- आरती, अज़ान है,
माँ- गीता और कुरआन है ।
माँ- ठण्ड में गुनगुनी धूप है,
माँ- उस रब का ही एक रूप है ।
माँ- तपती धूप में साया है,
माँ- आदि शक्ति महामाया है ।
माँ- जीवन में प्रकाश है,
माँ- निराशा में आस है ।
माँ- महीनों में सावन है,
माँ- गंगा सी पावन है ।
माँ- वृक्षों में पीपल है,
माँ- फलों में श्रीफल है ।
माँ- देवियों में गायत्री है,
माँ- मनुज देह में सावित्री है ।
माँ- ईश् वंदना का गायन है,
माँ- चलती फिरती रामायन है ।
माँ- रत्नों की माला है,
माँ- अँधेरे में उजाला है,
माँ- बंदन और रोली है,
माँ- रक्षासूत्र की मौली है ।
माँ- ममता का प्याला है,
माँ- शीत में दुशाला है ।
माँ- गुड सी मीठी बोली है,
माँ- ईद, दिवाली, होली है ।
माँ- इस जहाँ में हमें लाई है,
माँ- की याद हमें अति की आई है ।
माँ- मैरी, फातिमा और दुर्गा माई है,
माँ- ब्रह्माण्ड के कण कण में समाई है ।
माँ- ब्रह्माण्ड के कण कण में समाई है ।
"अंत में मैं बस ये इक पुण्य का काम करता हूँ,
दुनिया की सभी माँओं को दंडवत प्रणाम करता हूँ...।"

Friday, 9 May 2014

LATEST UPDATES - JAIN VAANI

श्रद्धा हमारी भाषा, निष्ठा हमारा नारा ।
गुरुदेव की शरण से, भव का मिले किनारा ।।
हम गुरु के शिष्य ऐसे, जैसे दिये में बाती ।
जलते रहेंगे हरदम, चाहे हो तूफाँ पानी ।।
गुरु हैं हमारे ऐसे, जैसे श्री वीर भगवन् ।
श्री कुंद-कुंद स्वामी, जैसा पवित्र जीवन ।।
चरणों का स्पर्श पाकर, हो जाती माटी चंदन ।
पारस हैं आप गुरुवर, हमको बना दो कुंदन ।।
दुखियों के दुःख हरने, हरदम खड़े रहेंगे ।
हर आंच में जलेंगे, कर्मो से हम लड़ेंगे ।।
शुद्धोपयोगी गुरुवर, बस एक भावना है ।
बन जायें आप जैसे, कुछ और चाह ना है ।।


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JAIN VAANI UPDATE TODAY...


परमश्रद्धेय आचार्यश्री महाश्रमण पदाभिषेक-दिवस - ८
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धर्मसंघ को और अधिक ऊंचाइयां देंगे आचार्य श्री महाश्रमण :
साध्वीप्रमुखाश्री कनकप्रभाजी
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संक्षेप में अगर हम आचार्यों की दायित्व की बात पर चर्चा करें तो
सूत्र की भाषा में कहा जा सकता है कि
तेरापंथ के आचार्यों के पांच प्रमुख दायित्व हैं -
१. आगम परम्परा की सुरक्षा
२. नीतिनियामकता - नीति के निर्धारण का पूरा दायित्व आचार्य पर है |
३. संघ में शिक्षा का विकास
४. संघ का निर्माण या स्थिरीकरण
५. संघ व्यवस्था का समुचित संचालन

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Thursday, 8 May 2014

JAIN VAANI - MAHAVEER VAANI

महावीर मुसलमान थे।
क्योंकि उनके पास मुकम्मल ईमान थे।
महावीर सिख थे।
क्योंकि वे सितम करने से ख़बरदार करते थे।
महावीर हिन्दू थे।
क्योंकि वे हिंसा से दूर थे
और सब जीवों से प्यार करते थे।
महावीर पारसी थे।
क्योंकि उनमें संसार के पार देखने की क्षमता थी।
महावीर आर्यसमाजी थे।
क्योंकि उनमें सत्य के प्रति ममता थी।
हाँ, महावीर बुद्ध थे।
क्योंकि उनके उसूल दुर्बुद्धि के विरुद्ध थे।
और हाँ ! महावीर इसाई भी थे
क्योंकि वे इंसानियत के साईं भी थे।
लेकिन, महावीर जैन नहीं थे।
क्योंकि उनकी वाणी में
हमारी जिव्हा की तरह कटु बैन नहीं थे,
उनके हृदय में श्वेताम्बर-दिगम्बर का झगड़ा न था,
उनके अन्तस् में
बीस और तेरह का रगड़ा न था,
वे नियम थोपते नहीं थे,
वे हिंसा रोपते नहीं थे,
वे नित नए धर्म गढ़ते नहीं थे,
वे लकीर के फ़क़ीर बनकर लड़ते नहीं थे,
वे हमारी तरह ढोंगी नहीं थे,
वे दिन के जोगी रात के भोगी नहीं थे,
वे तो आडम्बरों के बिन थे सचमुच........
मेरे महावीर जैन नहीं थे
….’जिन’ थे।



JAIN VAANI...


Wednesday, 7 May 2014

Reasons of establishment of the Teerths

Teerthankaras and various ascetic saints have practiced penance, meditation, self-control etc. to get free from the worldly troubles of birth, old age & death and they show the path to world to get rid of these troubles.

In this way, those are well wishers of world without any reason or expectations. Only due to this reason they are called the headers of Moksha Marga (The path of salvation).

Tuesday, 6 May 2014

Welcome to Jain Vaani

Aaj ke is yug me har cheez aadhunik ho gai hai. Toh humara jain dharam kyu piche rahe. Jain dharam ko aaj ki pidhi tak pahuchane ke liye "Shree Vidyasagar Nav Yuvak Mandal Mandideep (VSNYM)" Ne ek aur atyadhunik kadam uthaya hai. 'Jainvaani- Jain dharam ka samaagam', ek matr aisa online radio station hai jaha apko live jain bhajan sunne k saath saath jain dharam se judi kai mahatvapurn baate jaise thirth kshetra, guruo ki jeevansheli, jain vradhashram, jain vidhyalay aadi ki jankari mil sakegi.